यमन में सऊदी और UAE समर्थित बल आमने-सामने, तनाव के बीच शांति वार्ता की अपील!
दक्षिण पश्चिम एशिया के यमन में सन् 2014 के बाद से चल रहे गृहयुद्ध के परिदृश्य में नई घटनाएँ देखने को मिली हैं, जहां सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के समर्थित बलों के बीच संघर्ष तेज़ हो गया है और दोनों देशों की भूमिका ने इस युद्ध को एक नए समीकरण में डाल दिया है।
हाल के महीनों में यमन के दक्षिणी हिस्से में Southern Transitional Council (STC) नामक अलगाववादी समूह ने उग्र गतिविधियाँ तेज़ कर दी हैं और कुछ इलाक़ों पर नियंत्रण बढ़ाया है, जिसमें तेल-समृद्ध हद्रामावट प्रांत भी शामिल है। इस समूह को UAE का समर्थन मिलता है, जबकि सऊदी-समर्थित सरकारी गठबंधन इसे “विद्रोह” के रूप में देखता है।
UAE-समर्थित बलों द्वारा एक बड़े पैमाने पर सैनी अभियान शुरू किए जाने के बाद ही दोनों पक्षों के बीच प्रत्यक्ष संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसमें हवाई हमले और भूसैनिक लड़ाई की रिपोर्टें आईं। सऊदी अरब ने इस बढ़ते तनाव के बीच कहा है कि यमन के “दक्षिणी कारण” पर शांति-संबंधी बातचीत के लिए एक व्यापक वार्ता रियाद में बुलानी चाहिए, ताकि विभिन्न समूहों के बीच समाधान की दिशा पर चर्चा हो सके।
इस संघर्ष का मानवीय प्रभाव भी गहरा है: यमन में लाखों लोग लंबे समय से गृहयुद्ध, आर्थिक तंगी और खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित हुई है, और कई परिवारों ने सुरक्षा की स्थिति की अनिश्चितता का सामना बताया है।
विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी-UAE दरम्यान खींचतान न केवल यमन के संघर्ष को प्रभावित करती है, बल्कि पूरे क्षेत्र में राजनीतिक संतुलन, पहले से मौजूद अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों को भी मजबूत करती है।
यह कहना मुश्किल है कि आगामी कूटनीतिक पहल कितनी प्रभावी होंगी, लेकिन रियाद द्वारा वार्ता की अपील यह संकेत देती है कि तनाव कम करने की दिशा में भी कुछ प्रयास जारी हैं।
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