परमाणु ऊर्जा की दिशा में NTPC का बड़ा कदम, विदेशी कंपनियों से सहयोग की पहल!


नई दिल्ली: भारत की सबसे बड़ी विद्युत् उत्पादक कंपनी NTPC Ltd ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए विदेशी कंपनियों के साथ महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कंपनी ने रूस की Rosatom और फ्रांस की EDF के साथ नॉन-डिस्क्लोज़र समझौते (NDAs) पर हस्ताक्षर किए हैं, ताकि बड़े प्रेसराइज्ड वाटर रिएक्टर (PWR) परियोजनाओं पर संभावित सहयोग के अवसरों का प्रारंभिक मूल्यांकन किया जा सके।

ये समझौते परियोजना के संकल्पना से लेकर कमीशनिंग तक के पूरे चक्र को कवर करते हैं। इसके साथ ही कंपनी तकनीकी विशेषताओं का विश्लेषण करेगी, जिससे भविष्य में वैश्विक तकनीकी विकल्पों पर निर्णय लेने में मदद मिलेगी। Rosatom, EDF के अलावा कोरिया इलेक्ट्रिक पावर कंपनी और अमेरिका की Westinghouse जैसी फर्मों ने भी भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अपनी भागीदारी के संकेत दिए हैं।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में निजी और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए कानूनों में ढील दी है, ताकि तकनीकी साझेदारी और निवेश बढ़ सके। NTPC का लक्ष्य है कि वह 2047 तक 30 GW की परमाणु क्षमता विकसित करे, जो भारत की राष्ट्रीय लक्ष्य 100 GW परमाणु शक्ति क्षमता का एक हिस्सा होगा।

NTPC फिलहाल NPCIL (Nuclear Power Corporation of India Ltd) के साथ साझेदारी में राजस्थान के Mahi Banswara परमाणु प्रोजेक्ट पर काम कर रही है और वो छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) जैसे आधुनिक विकल्पों का भी परीक्षण कर रही है।

ये पहल भारत की ऊर्जा विविधीकरण रणनीति के तहत देखी जा रही हैं, जिसमें पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के अलावा स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है।


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यह लेख तटस्थ रूप से तैयार किया गया है और इसमें उपलब्ध समाचार स्रोतों के आधार पर जानकारी दी गई है। इसका उद्देश्य किसी भी संगठन, नीति, कंपनी या तकनीकी साझेदारी का समर्थन या विरोध करना नहीं है। लेख में वर्णित योजनाएँ और साझेदारियाँ रिपोर्ट के समय उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं और भविष्य में बदल सकती हैं।