Budget 2026: नवीकरणीय ऊर्जा सेक्टर चाहता है ऊर्जा संक्रमण के लिए मजबूत समर्थन!


जैसे ही केंद्रीय बजट 2026–27 के लिये तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं, भारत का नवीकरणीय ऊर्जा सेक्टर सरकार से ज़्यादा नीति-और वित्तीय समर्थन की उम्मीद कर रहा है ताकि देश अपनी ऊर्जा संक्रमण (energy transition) को और तेज़ गति दे सके। विशेषज्ञ और उद्योग नेता चाहते हैं कि बजट केवल क्षमता वृद्धि तक सीमित न रहे, बल्कि सिस्टम की मजबूती, वितरण, और वित्तीय ढाँचे में सुधार पर भी ज़ोर दे।

क्या है मांगें?

  • डिसेंट्रलाइज़्ड और रूफटॉप सोलर ऊर्जा के लिये लक्षित प्रोत्साहन और नीतियाँ।
  • ऊर्जा भंडारण, बैटरी स्पोर्ट और ग्रिड आधुनिकीकरण के लिये वित्तीय सहायता।
  • घरेलू सोलर सामग्री निर्माण को बढ़ावा देने के लिये आसान नियमन और सीमा शुल्क में छूट।
  • डिस्कॉम वित्तीय सुधार ताकि Renewable Power Purchase Agreements (PPAs) को जल्दी लागू किया जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने 226 GW से अधिक स्थापित नवीकरणीय क्षमता बना ली है और 2030 तक 500 GW लक्ष्य हासिल करने की ओर अग्रसर है, लेकिन आगे की राह नीति सहायक, वित्तीय समर्थन और वितरण नेटवर्क में सुधार के बिना चुनौतीपूर्ण रहेगा।

इसके अलावा, नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने सुझाव दिया है कि बजट में PM कुसुम और PM सूर्य घर जैसे कार्यक्रमों को निरंतर समर्थन प्रदान किया जाना चाहिए, जो खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा संक्रमण को फैलाने में मदद कर रहे हैं।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

भारत की ऊर्जा मांग बढ़ रही है और वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिये कोयले पर निर्भरता कम करना और साफ़ ऊर्जा संसाधनों को अपनाना जरूरी है। बजट 2026 इस संक्रमण को आर्थिक, तकनीकी और नीतिगत रूप से समर्थन देने का एक बड़ा मौका है।


Disclaimer :

यह लेख केवल सामान्य जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से लिखा गया है और निवेश, नीति या वित्तीय सलाह नहीं है। बजट संबंधी अंतिम निर्णयों और घोषणाओं के लिये सरकारी स्रोतों और आधिकारिक बजट दस्तावेज़ों को देखें।