रूस पर प्रतिबंधों को लेकर नया अमेरिकी बिल, भारत-चीन पर बढ़ सकता है दबाव!
यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर दबाव बढ़ाने की दिशा में अमेरिका ने एक और अहम कदम उठाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के खिलाफ एक नए प्रतिबंध विधेयक का समर्थन किया है, जिसका उद्देश्य रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बनाना है। इस बिल को अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम आगे बढ़ा रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित विधेयक के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ या अन्य आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इनमें भारत, चीन और ब्राज़ील जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के नाम भी सामने आए हैं।
विधेयक का उद्देश्य क्या है?
अमेरिकी सांसदों का कहना है कि रूस को मिलने वाली ऊर्जा आय उसके सैन्य अभियानों का एक बड़ा स्रोत है। इस बिल का मकसद रूसी तेल निर्यात से होने वाली कमाई को सीमित करना और युद्ध के लिए फंडिंग पर रोक लगाना है। प्रस्ताव के अनुसार, राष्ट्रपति को यह अधिकार मिल सकता है कि वे रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर बहुत ऊँचे टैरिफ लागू करें।
भारत और चीन का संदर्भ
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत और चीन ने रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है। अमेरिका का मानना है कि इससे वैश्विक प्रतिबंधों का प्रभाव कमजोर होता है। हालांकि, भारत पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि उसकी ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित है।
आगे क्या?
यह विधेयक अभी अमेरिकी संसद में विचाराधीन है और इसके अंतिम रूप में बदलाव संभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कानून बनता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाज़ार, व्यापार संबंधों और कूटनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है।
Disclaimer :
यह लेख विभिन्न सार्वजनिक समाचार स्रोतों पर आधारित है और केवल सूचना देने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसका उद्देश्य किसी भी देश, सरकार या नीति का समर्थन या विरोध करना नहीं है। विधेयक अभी प्रस्तावित चरण में है और इसमें आगे बदलाव संभव हैं।