मद्रास हाई कोर्ट का दीपम विवाद पर फैसला — थिरुपरंकुंद्रम मामले में दिशा बदली!
चेन्नई/मदुरै — मद्रास हाई कोर्ट (Madras High Court) ने मंगलवार (6 जनवरी) थिरुपरंकुंद्रम हिल पर दीपम (दीप) जलाने के विवाद में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। डिविजन बेंच ने एकल न्यायाधीश के उस निर्णय को बरकरार रखा, जिसमें मंदिर प्रबंधन (देवस्थानम) को थिरुपरंकुंद्रम की ऊँची पहाड़ी पर स्थित प्राचीन पत्थर स्तम्भ (Deepathoon) पर दीप जलाने की इजाज़त दी गई थी।
यह मामला करथिगई दीपम (Karthigai Deepam) त्योहार से जुड़ा है, जो तमिल नाडु में हिंदू परंपरा के अनुसार ऐतिहासिक रूप से मनाया जाता है। अदालत ने कहा कि ऐसी परंपराओं में दीप जलाना किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचाता और इसे लोगों के लिए देखा/अनुभव किया जा सकता है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मंदिर देवस्थानम ही दीप जलाए और सामान्य भक्तों को सुरक्षा कारणों से दीप जलाने वाले कार्यक्रम का हिस्सा बनने की अनुमति नहीं दी जाए।
सरकार, स्थानीय प्रशासन, वक़्फ़ बोर्ड और दर्गाह के प्रतिनिधियों ने कहा था कि पत्थर स्तम्भ (Deepathoon) के बारे में कोई ठोस ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं है कि यह दीप जलाने के लिए बनाया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला धार्मिक परंपरा बदलने जैसा है और इसे सिविल अदालतों में तय किया जाना चाहिए था।
इस विवाद ने राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया है और इस मुद्दे को लेकर राज्य में कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक समरसता के संभावित प्रभाव पर चर्चा जारी है।
Disclaimer :
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार स्रोतों और कोर्ट के फैसले के विवरण पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी पक्ष, धर्म, या संस्थान का समर्थन या विरोध नहीं करती है. पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे अधिक विस्तृत और अधिकारिक स्रोतों से नवीनतम अपडेट प्राप्त करें, क्योंकि न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आगे बदलाव हो सकते हैं।