कनाडा में अस्पताल इंतज़ार और मौत: स्वास्थ्य सेवा पर सवाल उठे!



कनाडा के एडमोंटन में एक 44 वर्षीय भारतीय मूल के व्यक्ति प्रशांत श्रीकुमार की अस्पताल में लंबे इंतज़ार के बाद मौत ने देश की स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था (Medicare) को फिर से चर्चा में ला दिया है। प्रशांत को 22 दिसंबर 2025 को तेज़ सीने के दर्द की शिकायत पर Grey Nuns Community Hospital के इमरजेंसी रूम में ले जाया गया, लेकिन करीब 8 घंटे इंतज़ार के बाद ही उन्होंने अंतिम साँस ली — स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार संभावित हृदयाघात के कारण। 

हॉस्पिटल में प्रथमिक जांच में उन्हें ECG और दर्द निवारक दवा दी गई, लेकिन तुरंत इलाज नहीं मिला। इंतज़ार के दौरान उनका रक्तचाप बढ़ता गया और जब उन्हें इमरजेंसी में ले जाया गया, तो वे क्षणों में गिर पड़े और उनका निधन हो गया। उनके परिवार के सदस्यों ने कहा कि प्रशांत बार-बार दर्द की शिकायत कर रहे थे, लेकिन इलाज देर से मिलने के कारण यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना बनी। 


इस घटना के बाद कनाडाई स्वास्थ्य प्रणाली के ढांचे पर सवाल उठने लगे हैं, विशेष रूप से आपातकालीन सेवाओं में लंबी प्रतीक्षा अवधि और कर्मचारियों व संसाधनों की कमी को लेकर। एक अध्ययन के अनुसार कनाडा भर में कई मरीजों को 24 घंटे से अधिक इंतज़ार करना पड़ता है और प्राथमिक देखभाल तक पहुंच में भी बाधाएँ हैं, जिससे सीधे तौर पर ER पर दबाव बढ़ता है। 

उसकी मौत पर उसकी पत्नी ने अस्पताल की लापरवाही का आरोप लगाया और न्याय की मांग की है, जिससे यह मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है। इस पर कुछ आलोचकों और वैश्विक नेताओं ने भी टिप्पणियाँ की हैं — जैसे एलन मस्क ने कनाडाई हेल्थकेयर व्यवस्था की तुलना अमेरिकी DMV से करते हुए उसकी कार्यक्षमता पर सवाल उठाया। 


विशेषज्ञ बताते हैं कि कनाडा की Medicare प्रणाली कई लोगों को आर्थिक रूप से मुफ्त इलाज प्रदान करती है, लेकिन संसाधनों की कमी और बढ़ती मांग के कारण प्रतिक्रिया समय और सेवा गुणवत्ता पर दबाव बना रहता है। इस घटना ने यह भी संकेत दिया है कि “मुफ्त” सेवाओं में भी प्राथमिकता, बुनियादी ढांचा और कर्मचारियों की उपलब्धता पर गंभीर चुनौतियाँ मौजूद हैं, जो स्वास्थ्य सेवा की देरी का कारण बन सकती हैं। 


कुल मिलाकर, प्रशांत श्रीकुमार की मौत कनाडा की स्वास्थ्य सेवा की क्षमताओं, प्राथमिक देखभाल तक पहुंच और आपातकालीन प्रतिक्रिया समय की समीक्षा का विषय बन गई है, और यह बहस जारी है कि कैसे इस तरह की त्रासदियों से बचा जा सके और सेवाओं को बेहतर बनाया जा सके।