भारत–इटली ने रक्षा समझौता किया: 48 टॉरपीडो से भारतीय नौसेना की शक्ति में वृद्धि!
भारत ने अपनी सुरक्षा और सामरिक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने इटली की WASS Submarine Systems S.R.L. के साथ 48 हैवीवेट टॉरपीडो और संबंधित उपकरणों की खरीद के लिए लगभग ₹1,896 करोड़ का अनुबंध किया है। यह डील कलवरी-क्लास (Kalvari-class) पनडुब्बियों की क्षमता में वृद्धि करेगी, जो भारतीय नौसेना के सबसे आधुनिक सबमरीन प्लेटफॉर्म में से हैं।
📌 मुख्य बातें — आसान और स्पष्ट
🔹 डील का उद्देश्य:
भारतीय नौसेना की छह Kalvari-class सबमरीन की अंडरवाटर युद्ध क्षमता को बढ़ाना। इन टॉरपीडो से पनडुब्बियाँ समुद्र में अधिक प्रभावी रूप से दुश्मन जहाज़ों और पनडुब्बियों को निशाना रख सकेंगी।
🔹 अनुबंध का दायरा:
48 भारी टॉरपीडो और संबंधित उपकरणों की खरीद तथा उनमें समेकन के लिए इटली की कंपनी WASS के साथ करार हुआ है।
🔹 लागत और डिलीवरी:
यह अनुबंध लगभग ₹1,896 करोड़ का है और टॉरपीडो की डिलीवरी अप्रैल 2028 से शुरू होकर 2030 तक पूरी होने की योजना है।
🔹 उन्नत क्षमता:
ये टॉरपीडो आधुनिक तकनीक से लैस हैं और भारतीय नौसेना की लड़ाकू ताकत को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
🌊 रणनीतिक महत्त्व
इंडियन नेवी की सबमरीन फ़ोर्स समुद्री डोमेन में देश की सुरक्षा के “तल में तीर” की तरह काम करती है। ऐसे हथियारों की खरीद ना केवल नौसेना की मारक क्षमता बढ़ाती है, बल्कि भारत की समुद्री सामरिक पैठ और डिटरेंस क्षमता को भी मज़बूत बनाती है।
इस डील के साथ ही भारत ने अपनी रक्षा साझेदारी को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाया है, खासकर इटली जैसे संभावित सहयोगी के साथ। इसके अलावा यह कदम भारत के “आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन” और Make in India पहल की प्राथमिकताओं को भी समर्थन देता है।
📌 निष्कर्ष:
48 आधुनिक हैवीवेट टॉरपीडो की खरीद से भारतीय नौसेना की Kalvari-class पनडुब्बियाँ और अधिक सक्षम होंगी, जिससे भारत समुद्री चुनौतियों का प्रभावी मुकाबला कर सकेगा। यह कदम सामरिक संतुलन और क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण में भारत की स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा साबित होगा।